राजस्थान के इतिहास का सामान्य परिचय Rajasthan history Gk


Sunday, May 2, 2021




राजस्थान के इतिहास का सामान्य परिचय

राजस्थान का इतिहास


- इतिहास शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के हिस्तरी शब्द में मानी जाती है जिसका अर्थ बुनना जोड़ना होता है।


- इतिहास से तात्पर्य - घटित घटनाएँ जिनका लिखित साक्ष्य उपलब्ध हों।


- अतीत से आशय - ऐसी घटनाएँ जिनका कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध न हो।


- भारतीय इतिहास का जन्म सभ्यता काल से माना जाता है।


- राजस्थान इतिहास में राजपूत काल का प्रारंभ 7वीं सदी के मध्य से माना जाता है।


 


कर्नल जेम्स टॉड


 कर्नल जेम्स टॉड का जन्म 20 मार्च, 1782 को इंग्लैण्ड में हुआ था।


- 1798 ई. में टॉड एक सैन्य अधिकारी के रूप में भारत (पश्चिम बंगाल में) आए थे।


- 1806 ई. में टॉड सर्वप्रथम राजस्थान (माण्डलगढ़ - भीलवाड़ा) आए थे।


- 1813 ई. में टॉड को कर्नल की उपाधि दी गई।


- 1817-1818 ई. में राजपूताना में पॉलिटिकल एजेंट के रूप में कार्य किया।


- टॉड को घोड़े वाले बाबा के उपनाम से जाना जाता है।


- 1822 ई. में टॉड वापस इंग्लैण्ड रवाना हुए और 18 नवम्बर, 1835 को उनका निधन हो गया।


 


 


 राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1800 ई. में जॉर्ज थॉमस ने किया था।

 राजपूताना शब्द का लिखित रूप से सर्वप्रथम प्रयोग 1805 ई. में विलियम फ्रेंकलिन ने अपनी पुस्तक ‘द मिलिट्री मेमोयर्स ऑफ जॉर्ज थॉमस’ नामक पुस्तक में किया था।


 


 कर्नल जेम्स ने अपनी पुस्तक ‘एनाल्स एण्ड एण्टिक्विटीज ऑफ राजस्थान’ (1829 ई. में प्रकाशित) में सर्वप्रथम रायथान शब्द का प्रयोग किया था।

- इसी पुस्तक का दूसरा भाग ‘द सेन्ट्रल एण्ड वेस्टर्न स्टेट राजपूताना ऑफ इण्डिया’ 1832 ई. में प्रकाशित हुआ, जिसमें कर्नल जेम्स टॉड ने सर्वप्रथम राजस्थान शब्द का प्रयोग किया था।


 


 कर्नल जेम्स टॉड द्वारा पुस्तक ‘एनाल्स एण्ड एण्टिक्विटीज ऑफ राजस्थान’ नामक पुस्तक टॉड के गुरु यतिज्ञानचन्द्र को समर्पित है एवं इस पुस्तक के संपादक टॉड के शिष्य विलियम क्रुक थे।


 


 T.H. हेण्डले के अनुसार - राजस्थान की आकृति पतंगाकार विषमकोणीय चतुर्भुजाकार है।


 


राजस्थान के एकीकरण के समय कुल 19 रियासतें, 3 ठिकाने (नीमराणा- अलवर, लावा- टोंक व कुशलगढ़ - बाँसवाड़ा) एवं केन्द्रशासित प्रदेश अजमेर – मेरवाड़ा था।


1. मेवाड़ (उदयपुर) - राजस्थान की सबसे प्राचीन रियासत। (गुहिल राजवंश)

2. बांसवाड़ा \longrightarrow⟶ महारावल

3. प्रतापगढ़ \longrightarrow⟶ महाराव 

4. डुंगरपुर \longrightarrow⟶ महारावल

 5. करौली \longrightarrow⟶ यादव राजवंश

6. जैसलमेर \longrightarrow⟶यादव राजवंश

7. अलवर - नरुका

8. आमेर (जयपुर) - जनंसख्या की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत कच्छवाहा राजवंश

9. भरतपुर \longrightarrow⟶जाट राजवंश

10. धौलपुर \longrightarrow⟶जाट राजवंश

11. सिरोही - देवड़ा

12. शाहपुरा - क्षेत्रफल व जनंसख्या की दृष्टि से सबसे छोटी रियासत

13. कोटा \longrightarrow⟶ हाड़ा राजवशं 

14. बूँदी \longrightarrow⟶हाड़ा राजवशं

15. झालावाड़ - राजस्थान की नवीनतम रियासत

16. टोंक - एकमात्र मुस्लिम रियासत

17. जोधपुर (मारवाड़) - क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत (राठौड़ राजवंश)

18. बीकानेर \longrightarrow⟶ राठौड़ राजवंश

19. किशनगढ़ \longrightarrow⟶ राठौड़ राजवंश


 राजपूतों की उत्पति के संदर्भ में अग्निकुण्ड सिद्धांत चन्दबरदाई ने दिया।


- चन्दबरदाई के ग्रंथ पृथ्वीराज रासो के अनुसार वशिष्ठ मुनि ने आबू पर्वत पर यज्ञ किया और चार राजपूत जातियों की उत्पति हुई –


 1. गुर्जर प्रतिहार  

 2. परमार

 3. सोलंकी / चालुक्य

  4. चौहान / चहमान


 डी.आर. भण्डाकर के अनुसार राजपूतों की उत्पति ब्राह्मणों गुर्जरों से हुई है।


- इतिहासकार गोपीनाथ शर्मा ने इस मत का समर्थन किया है।


 


 राजपूतों की उत्पति के संदर्भ में मिश्रित जाति के सिद्धांत का प्रतिपादन डी.पी.चटोपाध्याय ने किया था। इनके अनुसार राजपूत ना तो देशी है और ना ही विदेशी।