आर्य और राजस्थान इतिहास Arya rajasthan history


Sunday, July 18, 2021

आर्य और राजस्थान

मरुधरा की सरस्वती और दृषद्वती जैसी नदियाँ

आर्यों की प्राचीन बस्तियों की शरणस्थली रही है। ऐसा

माना जाता है कि यहीं से आर्य बस्तियाँ कालान्तर में

दोआब आदि स्थानों की ओर बढ़ी। इन्द्र और सोम की

अर्चना में मन्त्रों की रचना, यज्ञ की महत्ता की स्वीकृति और

जीवन-मुक्ति का ज्ञान आर्यों को सम्भवतः इन्हीं नदी

घाटियों में निवास करते हुए हुआ था। महाभारत तथा

पौराणिक गाथाओं से प्रतीत होता है कि जांगल (बीकानेर),

मरुकान्तार (मारवाड़) आदि भागों से बलराम और कृष्ण

गुजरे थे, जो आर्यों की यादव शाखा से सम्बन्धित थे।

जनपदों का युग

आर्य संक्रमण के बाद राजस्थान में जनपदों का

उदय होता है, जहाँ से हमारे इतिहास की घटनाएँ अधिक

प्रमाणों पर आधारित की जा सकती हैं। सिकन्दर के

अभियानों से आहत तथा अपनी स्वतन्त्रता को सुरक्षित

रखने को उत्सुक दक्षिण पंजाब की मालव, शिवि तथा

अर्जुनायन जातियाँ, जो अपने साहस और शौर्य के लिए

प्रसिद्ध थी, अन्य जातियों के साथ राजस्थान में आयीं और

सुविधा के अनुसार यहाँ बस गयीं। इनमें भरतपुर का राजन्य

और मत्स्य जनपद, नगरी का शिवि जनपद, अलवर का

शाल्व जनपद प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त 300 ई. पू. से 300

ई. के मध्य तक मालव, अर्जुनायन तथा यौधेयों की प्रभुता

का काल राजस्थान में मिलता है। मालवों की शक्ति का

केन्द्र जयपुर के निकट था, कालान्तर में यह अजमेर, टोंक

तथा मेवाड़ के क्षेत्र तक फैल गये। भरतपुर-अलवर प्रान्त के.  


अर्जुनायन अपनी विजयों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इसी प्रकार

राजस्थान के उत्तरी भाग के यौधेय भी एक शक्तिशाली

गणतन्त्रीय कबीला था। यौधेय संभवतः उत्तरी राजस्थान

की कुषाण शक्ति को नष्ट करने में सफल हुये थे, जो

रुद्रदामन के लेख से स्पष्ट है।

लगभग दूसरी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी

के काल में राजस्थान के केन्द्रीय भागों में बौद्ध धर्म का

काफी प्रचार था, परन्तु यौधेय तथा मालवों के यहाँ आने से

ब्राह्मण धर्म को प्रोत्साहन मिलने लगा और बौद्ध धर्म के

हृास के चिह्न दिखाई देने लगे। गुप्त राजाओं ने इन

जनपदीय गणतन्त्रों को समाप्त नहीं किया, परन्तु इन्हें अर्द्ध-

आश्रित रूप में बनाए रखा। ये गणतन्त्र हूण आक्रमण के

धक्के को सहन नहीं कर पाये और अन्ततः छठी शताब्दी

आते-आते यहाँ से सदियों से पनपी गणतन्त्रीय व्यवस्था

सर्वदा के लिए समाप्त हो गई।