राजस्थान की जलवायु Climate of Rajasthan GK


Saturday, May 8, 2021




राजस्थान की जलवायु

जलवायु




भारतीय मानूसन एवं जलवायु की सर्वप्रथम व्याख्या अरबी यात्री अलमसूदी ने की।


किसी स्थान की दीर्घकालीन अवस्था जलवायु तथा अल्पकालीन अवस्था मौसम कहलाती है।


जलवायु के निर्धारक घटक तापक्रम, वायुदाब, आर्द्रता, वर्षा एवं वायु वेग हैं।


किसी भी क्षेत्र का उसके दाब, ताप व आर्द्रता का आकलन ही वहाँ का मौसम, ऋतु व जलवायु कहलाती है। यह सभी इन तीनों की औसत दशाएँ हैं। अगर इनका आकलन कुछ घंटों का हो तो वह मौसम कहलाता है तथा यही आकलन कुछ महीनों का हो तो वह ऋतु कहलाती है तथा कई वर्षों का आकलन जलवायु कहलाती है।


किसी भी क्षेत्र की जलवायु ज्ञात करने के लिए अक्षांश महत्वपूर्ण होते हैं तथा अक्षांशों की सहायता से ही उस क्षेत्र की जलवायु का निर्धारण किया जाता है। अक्षांशों के द्वारा विश्व को निम्नलिखित ताप कटिबंध क्षेत्रों में बांटा गया है –




राजस्थान का 1% भाग (डूँगरपुर व बाँसवाड़ा का दक्षिणी भाग) उष्ण ताप कटिबंधीय क्षेत्र में आता है तथा शेष 99% यानि कर्क से उत्तरी क्षेत्र शीतोष्ण ताप कटिबंधीय क्षेत्र में आता है।


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  अक्षांशों से 35° अक्षांशों तक ‘उपोष्ण जलवायु’ क्षेत्र आता है।


इसी कारण, राजस्थान की जलवायु शीतोष्ण ताप कटिबंधीय क्षेत्र में होते हुए भी उपोष्ण प्रकार की है।


जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक -


अक्षांशीय स्थिति :-


राजस्थान 23°3’ उत्तरी अक्षांश से 30°12’ उत्तरी अक्षांशों के मध्य स्थित है।

राजस्थान का धुर दक्षिण का भाग उष्ण कटिबंधीय में आता है। जबकि अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंध में आता है।

शीत ऋतु की समपात रेखाएँ अक्षांश रेखाओं के लगभग समान्तर दिखाई पड़ती हैं जिसमें तापमान में कर्क रेखा और 30° उत्तरी अक्षांश में अंतर प्रस्तुत होता है।

भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है, अतः राजस्थान की स्थिति भी उत्तरी गोलार्द्ध में है। राजस्थान उपोष्ण कटिबन्ध में आता है, लेकिन राजस्थान की जलवायु उष्ण कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु है।

समुद्र से दूरी :-


समुद्र (कच्छ की खाड़ी) से - 225 किमी. तथा अरब सागर से राजस्थान - 400 किमी. दूर है। अतः समुद्री प्रभाव नहीं होते हैं।

राजस्थान की स्थिति समुद्र से दूर तथा उपमहाद्वीप के आंतरिक भाग में होने के कारण समुद्र का समकारी प्रभाव नगण्य है।

यहाँ की जलवायु में महाद्वीपीय जलवायु से मुक्त है जो गर्म और शुष्क होती है, जिससे यहाँ नमी कम होती है।

समुद्र से दूरी बढ़ने पर शुष्कता बढ़ती है और आर्द्रता घटती है- उदाहरण : जोधपुर व कलकत्ता एक ही अक्षांश पर स्थित है, परंतु जोधपुर की जलवायु शुष्क जबकि कलकत्ता की जलवायु आर्द्र प्रकार की है।

भूमध्य रेखा से दूरी :-


111.4 × 23.3 = 2595.62 किमी.।


स्थान की समुद्र तल या धरातल से ऊंचाई :-


प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर 1°C तापमान कम हो जाता है। अतः माउण्ट आबू ठण्डा रहता है। राजस्थान के सामान्य तापमान व माउण्ट आबू के ताप में लगभग 11°C का अन्तर है।

राजस्थान की धरातलीय ऊँचाई 370 मीटर से कम है एवं अरावली पर्वतमाला और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र की धरातलीय ऊँचाई 370 मीटर से अधिक है।

पश्चिमी रेतीले भू-भाग में ग्रीष्म ऋतु में दिन का तापमान कभी-कभी 50°C तक पहुँच जाता है, वहीं रात्रि का तापमान 14°C से 17°C तक पहुँच जाता है।

शीत ऋतु में तापमान कभी हिमांक बिंदु से भी नीचे पहुँच जाता है और पाला पड़ना तो एक सामान्य बात है।

शीत ऋतु में पश्चिमी हवाओं के साथ आने वाले शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात जब राजस्थान से होकर गुजरते हैं, तब उत्तरी राजस्थान में अधिक तथा अन्य भागों में कम वर्षा करते हैं।

अरावली पर्वतमाला की स्थिति :-


अरावली पर्वतमाला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर राज्य के मध्य भाग में कर्णवत् रूप में फैली हुई है। जो अरब सागरीय मानसून के समानान्तर है। इस कारण राजस्थान में अधिक वर्षा नहीं हो पाती है।

वर्षा ऋतु में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व को बहने वाली मानसूनी हवाएं इनके सहारे-सहारे बे-रोकटोक हिमालय पर्वत तक पहुँच जाती हैं।

राजस्थान में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है, जिससे राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के पूर्व में वर्षा अच्छी होती है, जबकि पश्चिमी भाग में न्यूनतम वर्षा होती है।

भौगोलिक स्थिति (प्रकृति) :-


अरावली पर्वतमाला की स्थिति - दक्षिण पश्चिम - उत्तर-पूर्व।

राजस्थान विश्व के सबसे युवा मरूस्थल (थार) का भाग है। अतः यहां गर्म जलवायु रहती है।

विभिन्न ऋतुओं में तापमान की विषमताओं के कारण राजस्थान की जलवायु को महाद्वीपीय जलवायु कहा जाता है।

राजस्थान के जलवायु प्रदेश (भारतीय मौसम विभाग द्वारा प्रस्तुत) :-


राजस्थान के जलवायु प्रदेश के निर्धारण में वर्षा एवं तापक्रम मुख्य मापदण्ड हैं, तापक्रम के अपेक्षा वर्षा को अधिक महत्व दिया जाता है और इस आधार पर पाँच भागों में जलवायु प्रदेश को बांटा गया है।






शुष्क जलवायु प्रदेश :–


यहां वनस्पति बहुत कम है। केवल कंटीली झाड़ियां हैं। वर्षा का औसत : 10-20 सेमी. । पश्चिमी राजस्थान वाष्पीकरण दर अधिक तापमान -: ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 45°C-50°C और शीत ऋतु में तापमान - 0°C-8°C रहता है।


विस्तार क्षेत्र – शुष्क रेतीला मैदान – बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, दक्षिणी श्रीगंगानगर, पश्चिमी जोधपुर।


विशेषता –


मरुद्भिद वनस्पति (जीरोफाइट्स) पाई जाती है।

ग्रीष्म ऋतु में लू व धूल भरी आंधियाँ चलती हैं।

दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर उच्च होता है।

प्रतिनिधि नगर – जैसलमेर


अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश –


वर्षा का औसत - 20 से 40 सेमी.। ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 36°-42°C और शीत ऋतु में - 10°-17°C रहता है।


विस्तार क्षेत्र – अरावली के पश्चिम में – श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनूँ, चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली, जालोर।


प्रतिनिधि नगर – जोधपुर


विशेषता –


स्टेपी तुल्य वनस्पति पाई जाती है।


उप आर्द्र जलवायु प्रदेश –


यह पर्वतीय व पतझड़ वनस्पति पाई जाती है। वर्षा का औसत- 40 से 60 सेमी.। ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 28°-34°C शीत ऋतु में तापमान - 12°-18°C रहता है।


विस्तार क्षेत्र – अरावली के समान्तर वाला क्षेत्र – जयपुर, दौसा, अलवर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, सिरोही।


प्रतिनिधि नगर - जयपुर


आर्द्र जलवायु प्रदेश :–


पतझड़ वाले वृक्ष पाए जाते हैं। वर्षा का औसत - 60 से 80 सेमी.। ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 30°-34°C शीत ऋतु में तापमान - 14°-17°C रहता है।


विस्तार क्षेत्र – भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, बूँदी, राजसमंद, चित्तौड़गढ़।


प्रतिनिधि नगर – सवाई माधोपुर


अति आर्द्र प्रदेश :-


यहां मानसूनी सवाना वनस्पति पाई जाती है। वर्षा का औसत – 80-100 सेमी. या अधिक। ग्रीष्म ऋतु में तापमान 30°-40°C और शीत ऋतु में 12°-18°C रहता है।

सबसे छोटा जलवायु प्रदेश।

विस्तार क्षेत्र – झालावाड़, कोटा, बाराँ, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर, माउंट आबू।


प्रतिनिधि नगर - झालावाड़


राजस्थान में ऋतुएँ -


भूगोल में ऋतुएँ :- (1) ग्रीष्म (2) वर्षा (3) शीत।


ग्रीष्म ऋतु :-


21 मार्च के बाद सूर्य की स्थिति कर्क रेखा की ओर बनती है।

इसी दिन से सूर्य का उत्तरायण होना प्रारंभ होने से उत्तरी-गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु का आगमन शुरू हो जाता है।

उत्तरी-गोलार्द्ध का सबसे गर्म दिन 21 जून को माना जाता है क्योंकि इसी दिन सूर्य कर्क रेखा पर एकदम लम्बवत् चमकता है।

वार्षिक तापक्रम 14°C से 17°C रहता है और दोपहर के समय तापक्रम लगभग 36°C से 49°C तक पहुँच जाता है, श्रीगंगानगर में उच्चतम तापक्रम 50°C तक पहुँच जाता है।

जोधपुर, बीकानेर और बाड़मेर में 49°C, जयपुर और कोटा में 40°C और झालावाड़ में 47°C तक तापक्रम पहुँच जाता है।

राजस्थान के पश्चिम क्षेत्र में रात्रि का तापमान अचानक गिरने से दैनिक तापान्तर बहुत अधिक होता है। रात्रि का तापमान 14°C से 15°C तक पहुँच जाता है तथा अरावली के उत्तरी और पश्चिमी भागों में तापक्रम निरंतर बढ़ता जाता है। ग्रीष्मकालीन दिन का तापमान 48°C रहता है।

ग्रीष्मऋतु में राजस्थान में सूर्य की तीव्र किरणों, अत्यधिक तापमान, शुष्क व गर्म हवाओं, वाष्पीकरण की अधिकता के कारण आर्द्रता में कमी हो जाती है।

वर्षा ऋतु :-


भारतीय मानसून की उत्पत्ति अरब सागर से होती है। इसे ही दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहा जाता है। यह मानसून आगे चलकर हिन्द महासागर का मानसून कहलाता है।

भारतीय मानसून को अलनीनो व लानीनो प्रभाव प्रभावित करते हैं।

वर्षा का आगमन राज्य में मध्य जून से प्रारंभ होता है तथा सामान्य वर्षा का दौर सितंबर तक चलता है।

मानसून अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ - मौसम / ऋतु / हवाओं की दिशा में परिवर्तन होता है।

प्रथम सदी में एक अरबी नाविक ‘हिप्पौलस’ ने मानसून की खोज की (अवधारणा दी) थी।

अरब सागर का मानसून 1 जून के दिन केरल में प्रवेश करता है तथा यह मानसून पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराने के बाद दो शाखाओं में विभक्त हो जाता है।

अरब सागरीय मानसून शाखा


बंगाल की खाड़ी का मानसून शाखा


A. अरब सागरीय मानसून शाखा :-


अरब सागरीय मानसूनी शाखा राजस्थान में सर्वप्रथम बाँसवाड़ा जिले में प्रवेश करती है। (राजस्थान में मानसून का प्रवेश द्वार)

इस शाखा से राजस्थान के बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर तथा सिरोही में 10% वर्षा होती है।

अरब सागरीय मानसून का सर्वाधिक ठहराव तथा सर्वाधिक सक्रियता सिरोही जिले में होती है।

अरब सागरीय मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व रहती है।

अरब सागरीय मानसून से पश्चिमी राजस्थान में वर्षा नहीं होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली पर्वतमाला का अरब सागरीय मानसून के समांतर स्थित होना।

B. बंगाल की खाड़ी मानसून शाखा :-


दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी को स्थानीय भाषा में ‘पुरवाइयाँ’ कहा जाता है।

बंगाल की खाड़ी शाखा राजस्थान के झालावाड़ जिले से प्रवेश करती है तथा राजस्थान के अधिकांश जिलों में लगभग 90% मानूसनी वर्षा करती है।

इस मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम है।

इस शाखा से थार के मरुस्थल में वर्षा कम होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली का ‘वृष्टि छाया’ प्रदेश होना है।

भारतीय मानसून की उत्पत्ति :-


इसकी उत्पत्ति हिन्दमहासागर में ‘मेडागास्कर द्वीप’ के पास से मानी जाती है क्योंकि मई के माह में उच्च ताप व निम्न वायुदाब होता है इस कारण हवाएं मेडागास्कर के पास से दक्षिण-पश्चिम दिशा बहती हुई भारत की ओर आती हैं तथा सबसे पहले केरल तट पर वर्षा करती हैं। यहाँ मानसून दो भागों में बंट जाता है-

मासिनराम (मेघालय) विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।

दूसरा सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान ‘चेरापूंजी’ का नाम अब सोहरा कर दिया गया है।

इसके पश्चात् पश्चिम बंगाल, बिहार व उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश में वर्षा करता हुआ, झालावाड़ जिले में राजस्थान में प्रवेश करता है।

सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ (40 दिन)।

दूसरा सर्वाधिक वर्षा वाला जिला बाँसवाड़ा।

न्यूनतम वर्षा वाला जिला जैसलमेर (5 दिन)।

न्यूनतम वर्षा वाला स्थान - फलोदी।

सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान - माउण्ट आबू (153 सेमी. वार्षिक)।

राजस्थान में वर्षा जून से सितम्बर की अवधि में होती है।

50 सेमी. की सम वर्षा रेखा राज्य को दो विभागों में बांटती है। इस रेखा के दक्षिण और पूर्व में वर्षा अधिक होती है।

25 सेमी. की वर्षा रेखा द्वारा पश्चिमी राजस्थान को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है - (A) शुष्क प्रदेश (B) अर्द्ध शुष्क प्रदेश।

राजस्थान में वर्षा का वार्षिक औसत 57.51 सेमी. है।

वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की और कम होती जाती है।

शीत ऋतु :- 


राज्य में तापमान लगभग समान रहता है। औसत अधिकतम तापमान पश्चिमी राजस्थान में 36.1°C तथा पूर्वी राजस्थान में 35°C तथा न्यूनतम औसत तापमान 21.1°C से 17.7°C मिलता है।

23 सितंबर के बाद सूर्य दक्षिण गोलार्द्ध की ओर स्थित रहता है जिसे सूर्य का ‘दक्षिणायन’ होना कहते हैं।

सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्द्ध में तिरछी पड़नी शुरू हो जाती हैं, जिससे उत्तरी गोलार्द्ध में धीरे-धीरे शीत ऋतु का आगमन हो जाता है।

22 दिसंबर के दिन सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्द्ध में सर्वाधिक तिरछी पड़ती हैं।

राजस्थान का सबसे ठण्डा माह जनवरी है। सबसे ठण्डा जिला - चूरू। सबसे ठण्डा स्थान - माउण्ट आबू। दूसरा सबसे ठण्डा स्थान - डबोक (उदयपुर)।

राजस्थान में शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी मानसून से या भूमध्यसागरीय मानसून या पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा को ‘मावठ’ कहते हैं। यह रबी की फसलों के लिए उपयोगी है, इसे ‘गोल्डन ड्रोप्स’ या ‘सुनहरी बूंदे’ कहते हैं।

राज्य में मानसून पूर्व की वर्षा को ‘दोंगड़ा’ कहते हैं।

राज्य में भारतीय मौसम विभाग की ‘वैधशाला जयपुर’ में है।

राजस्थान में सम्भावित वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन वार्षिक दर सबसे अधिक जैसलमेर जिले में है।

वर्षा की मात्रा राज्य में दक्षिण-पूर्व से उत्तर - पश्चिम की और कम होती जाती है।

मानसून प्रत्यावर्तन का काल -: अक्टूबर - दिसम्बर के प्रारम्भ तक।

हवाएँ :-




राजस्थान में हवाएं दक्षिण-पश्चिम से पश्चिम की ओर चलती हैं।

राजस्थान में जून के महीने में हवाएँ सबसे तेज व नवम्बर के महीने में सबसे हल्की चलती हैं।

राज्य में वायु की अधिकतम गति लगभग 140 किमी./घण्टा है।

ग्रीष्म ऋतु में गर्म, तेज हवाएँ और आंधियाँ पश्चिमी राजस्थान की विशेषता है।

आंधियाँ :-


राजस्थान में सर्वाधिक आंधियाँ मई-जून के महीने में आती है।

राज्य में सर्वाधिक आंधियों वाला जिला - श्रीगंगानगर (27 दिन)।

राज्य में दूसरा सर्वाधिक आंधियों वाला जिला - हनुमानगढ़ (23 दिन)।

राज्य में न्यूनतम आंधियों वाला जिला - झालावाड़ (3 दिन)।

राज्य में दूसरा न्यूनतम आंधियों वाला जिला - कोटा (5 दिन)।

राज्य के पूर्वी एवं दक्षिणी-पूर्वी भागों में जून-जुलाई के महीनों में आने वाले तूफान को ‘वज्र तूफान’ कहते हैं। राज्य में सर्वाधिक वज्र तूफान झालावाड़ और जयपुर जिलों में आते हैं।

राजस्थान में छोटे क्षेत्र में उत्पन्न वायु भंवर (चक्रवात) को स्थानीय क्षेत्र में ‘भभूल्या’ कहते हैं।

जलवायु सम्बन्धी अन्य तथ्य :-


राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाले महीने - जुलाई, अगस्त

राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला - झालावाड़ (100 सेमी.)

राज्य में सबसे कम वर्षा वाला जिला - जैसलमेर (10 सेमी.)

राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान - माउण्ट आबू (सिरोही-125 से 150 सेमी.)

राज्य में सबसे कम वर्षा वाला स्थान - समगाँव (जैसलमेर 5 सेमी.)

50 सेमी. वर्षा रेखा राजस्थान को दो भागों में बांटती है।

राजस्थान में 50 सेमी. वर्षा रेखा उत्तर - पश्चिम में कम जबकि दक्षिण - पूर्व में अधिक होती है।

तथ्य - उत्तर-पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर चलने पर वर्षा का औसत बढ़ता हुआ दिखायी देता है। जबकि इसके विपरीत वर्षा का औसत घटता हुआ दिखायी देता है।

राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना - अगस्त

राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला महीना - अप्रैल

राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला - झालावाड़

राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला जिला - बीकानेर

राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान - माउण्ट आबू (सिरोही)

राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला स्थान - फलोदी (जोधपुर)

 

कोपेन के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश :-




AW या उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु प्रदेश :–


इस जलवायु प्रदेश के अंतर्गत डूँगरपुर जिले का दक्षिणी भाग एवं बांसवाड़ा,चित्तौड़गढ़ व झालावाड़ आते हैं। यहाँ का तापक्रम 18°C से ऊपर रहता है। इस प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु में तापमान (30°C- 40°C) तथा शीत ऋतु में तापमान (12°C- 15°C) रहता है। यहाँ की वनस्पति सवाना तुल्य एवं मानसूनी पतझड़ वाली आदि प्रमुख विशेषताएँ हैं। औसत वर्षा – 80-100 सेमी.।


Bshw या उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश :–


इस प्रदेश के अन्तर्गत, जालौर, बाड़मेर, सिरोही, पाली, नागौर, जोधपुर, चूरू, सीकर, झुंझुनूँ आदि आते हैं।

इस प्रदेश में जाड़े की ऋतु शुष्क, वर्षा कम (20-40 सेमी.) व स्टैपी प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। कांटेदार झाड़ियाँ एवं घास यहाँ की मुख्य विशेषता है।

ग्रीष्म ऋतु में तापमान 32°C-35°C और शीत ऋतु में तापमान 15°C-20°C रहता है।

यह कोपेन का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश है।

BWhw या उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश :–


यहाँ वर्षा बहुत कम होने के कारण वाष्पीकरण अधिक होता है।

इस प्रदेश में मरुस्थलीय जलवायु पाई जाती है। इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत-जैसलमेर, पश्चिमी बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी जोधपुर, हनुमानगढ़ तथा श्रीगंगानगर आदि आते हैं।

वर्षा 10-20 सेमी., ग्रीष्म ऋतु में तापमान 35°C से अधिक और शीत ऋतु में तापमान 12-18°C रहता है।

वनस्पति मरुद्भिद /Xerofights – जीरोफाइट्स एवं कंटीली पाई जाती हैं।

Cwg या उष्ण कटिबंधीय उपआर्द्र जलवायु प्रदेश :–


अरावली के दक्षिण-पूर्वी भाग इस जलवायु प्रदेश में आते हैं। यहाँ वर्षा केवल वर्षा ऋतु में होती है। वर्षा 60-80 सेमी.। शीतऋतु में कुछ मात्रा में वर्षा होती है। ग्रीष्म ऋतु में तापमान 28°C-34°C और शीत ऋतु में तापमान 12°C-18°C रहता है।


थार्नवेट के विश्व जलवायु प्रदेशों पर आधारित :-




राजस्थान जलवायु प्रदेश आधार -: वनस्पति, वाष्पीकरण मात्रा, वर्षा व तापमान।


EA' d उष्ण कटिबन्धीय मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश :–


यह अत्यन्त गर्म और शुष्क जलवायु प्रदेश है। यहां प्रत्येक मौसम में वर्षा की कमी अनुभव की जाती है।

वनस्पति केवल मरूस्थलीय ही उगती है।

राजस्थान के मरुस्थल में स्थित बाड़मेर, जैसलमेर, पश्चिमी जोधपुर, दक्षिणी-पश्चिमी बीकानेर आदि जिले इस प्रदेश के अन्तर्गत आते हैं।

औसत वर्षा 10-15 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर - जैसलमेर

DB' w मध्य तापीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश :–


इस प्रदेश के भागों में शीत ऋतु छोटी और शुष्क परन्तु ग्रीष्म ऋतु लम्बी और वर्षा वाली होती है।

यहाँ कंटीली झाड़ियाँ और अर्द्ध-मरुस्थलीय वनस्पति पाई जाती है। राजस्थान के ऊत्तरी भाग जैसे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जिले व चूरू एवं बीकानेर के अधिकांश भाग आदि जिले इस प्रदेश में आते हैं।

औसत वर्षा 15-20 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर - बीकानेर

DA' w उष्ण कटिबंधीय उपआर्द्र शुष्क जलवायु प्रदेश :–


इस प्रकार की जलवायु में ग्रीष्मकालीन तापमान ऊँचे रहते हैं। वर्षा कम होती है तथा अर्द्ध मरुस्थलीय वनस्पति पाई जाती है। राजस्थान का अधिकांश भाग अर्थात् बाड़मेर व जोधपुर का अधिकांश भाग, बीकानेर, चूरू एवं झुंझुनूँ का दक्षिणी भाग, सिरोही, जालोर, पाली, अजमेर, उत्तरी चित्तौड़, बूँदी, सवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, भरतपुर, जयपुर, अलवर आदि जिले इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत आते हैं।

यहां वर्षा 50-80 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर - अजमेर

CA' w उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु प्रदेश :–


इस प्रकार का प्रदेश अधिकांशतया दक्षिणी-पूर्वी उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, कोटा, बाराँ, झालावाड़ आदि जिलों में पाया जाता है। यहाँ वर्षा ग्रीष्म ऋतु में होती है। शीत ऋतु प्रायः सूखी रहती है। यहाँ सवाना तथा मानसूनी वनस्पति पाई जाती है।

यहाँ वर्षा 80-100 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर -डूँगरपुर

ट्रिवार्था के विश्व जलवायु प्रदेशों पर आधारित राजस्थान जलवायु प्रदेश :-




Aw उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु प्रदेश :–


इस प्रकार के प्रदेश में उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु मिलती है जिसमें तापमान 21°C तक रहता है और वर्षा 80-100 सेमी. तक होती है। बाँसवाड़ा, उदयपुर, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़, बाराँ, झालावाड़ इसके अन्तर्गत आते हैं।

प्रतिनिधि नगर - डूँगरपुर

Bsh उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश :–


उष्ण और अर्द्ध उष्ण कटिबन्धीय स्टेपी जलवायु इस प्रदेश की विशेषता है।

इस प्रकार की जलवायु पश्चिमी उदयपुर, हनुमानगढ़, राजसमन्द, सिरोही, जालौर, दक्षिणी-पूर्वी बाड़मेर, जोधपुर, पाली, अजमेर, नागौर, चूरू, झुंझुनूँ, सीकर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, पश्चिमी भीलवाड़ा आदि जिलों में मिलती है।

औसत वर्षा 40-60 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर - नागौर

Bwh उष्ण कटिबंधीय मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश :–


इस प्रदेश के अन्तर्गत उष्ण और अर्द्धउष्ण मरुस्थल जलवायु पाई जाती है। जैसलमेर, दक्षिण-पश्चिमी बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी बाड़मेर आदि जिले तथा उनके भू-भाग इसके अन्तर्गत आते हैं।

औसत वर्षा 10-20 सेमी. होती है।

प्रतिनिधि नगर - जैसलमेर

Caw उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु प्रदेश :–


यह अर्द्धउष्ण आर्द्र प्रदेश है जिसमें वर्षा 50-80 सेमी. होती है, शीत ऋतु में कुछ वर्षा चक्रवातों द्वारा होती है। इसमें कोटा, बूंदी, बाराँ, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, दौसा आदि जिले आते हैं।

प्रतिनिधि नगर – सवाई माधोपुर

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य :-


राजस्थान का दक्षिणी भाग कच्छ की खाड़ी से लगभग 225 किमी. एवं अरब सागर से 400 किमी. की दूरी पर स्थित है।

राजस्थान को 50 सेमी. की समवर्षा रेखा विभक्त करती है।

राजस्थान में सबसे छोटा दिन :- 22 दिसम्बर।

राजस्थान का जेकोकाबाद :- चूरू

997 Mb :- समदाबीय रेखा जैसलमेर, बीकानेर से गुजरती है।

998 Mb :- बीकानेर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ से।

999 Mb :- जालौर, पाली, अजमेर, टोंक, दौसा, भरतपुर से।

1000 Mb :- सिरोही, उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं झालावाड़ से।

जनवरी में समदाबीय रेखाएँ राजस्थान में 1017 Mb दक्षिणी राजस्थान से 1018 Mb मध्य राजस्थान से एवं 1019 Mb उत्तरी राजस्थान से गुजरती है।

राजस्थान में औसत वर्षा वाले दिनों की संख्या :- 29 दिन

जून में सूर्य बाँसवाड़ा जिले में लम्बवत् चमकता है।

राज्य का आर्द्र जिला :- झालावाड़

राजस्थान का अधिकांश क्षेत्र ‘उपोष्ण कटिबन्ध’ में स्थित है।​